Fish Curry (Machha Jhola)

Servings: 2

Ingredients:

  • Oil – 3 to 4 tbsp
  • Cumin Powder – 2 tbsp
  • Green Chilly (chopped) – 1
  • Onion (finely chopped) – 1 medium sized
  • Ginger Garlic Paste – 3 tbsp
  • Chilli Powder – 1 tsp
  • Turmeric Powder – 3/4 tsp
  • Salt – to taste
  • Coriander Powder 1 tsp
  • Garam Masala / Curry Masala – 1 tbsp
  • Tomato (finely chopped) – 1 medium sized
  • Fried fish – 4 medium sized pieces
  • Coriander leaves (finely chopped) – 2 tbsp

Process:

  1.  Heat oil in a wok / deep pan.
  2. Add cumin powder and green chilly to it. Let the chilies crackle for some time.
  3. Add chopped onions to it. When they are turn brown add ginger-garlic paste to it. Stir for a minute or two.
  4. Add chilly powder, turmeric powder, salt, coriander powder and garam masala/ curry masala. Stir it till the spices are cooked.
  5. Add chopped tomato to it. Let it cook.
  6. Add fried fish to it. Let it soak spices for a minute or two. Then add water to it. Allow it to boil on simmer for 10 minutes or so.
  7. Add chopped coriander leaves on top.
  8. Serve hot.
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बूढ़ी राक्षसनी और गरीब बालक

एक गरीब बालक था. उसका नाम बुधिया था. बुधिया के पिताजी बचपन में ही स्वर्गवासी हो गए थे, इसलिए वो अपनी माँ के साथ रहता था. उनका जीवनयापन बहुत मुश्किल से हो रहा था क्यूंकि उनकी कमाई का कोई ठोस जरिया नहीं था. उसकी माँ दूसरों के घर में बर्तन माजा करती थी. पर उसकी माँ बहुत साहसी थी क्योंकि इतनी विपरीत परिस्थिति में भी वो बुधिया को स्कूल भेज रही थीं.     बुधिया के स्कूल में सभी तरह के बच्चे पढ़ते थे. कुछ अमीर थे तो कुछ गरीब. प्रायः सभी दोपहर में होने वाले भोजनावकाश में खाने के लिए कुछ न कुछ लेकर आते थे. बुधिया गरीब होने के कारण कुछ नहीं ला पाता था, पर उसे इस बात से कोई शिकायत नहीं थी, क्योंकि वह घर की परिस्थितियों को अच्छे से समझता था. पर एक दिन उसका बाल मन खुदको नहीं रोक पाया जब उसका एक सहपाठी इडली लेकर आया. उसने घर पहुँच कर माँ से अगले दिन इडली बनाने के लिए कहा. उसकी माँ के पास इडली बनाने के लिए चावल तो थे पर उड़द की दाल नहीं थी.

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Thoughts

Like the river that flows in blue,
Like the blossoms those bloom,
Like the green that enriches the land,
I wish you to do the same.
I want you to flow in blue,
To open your heart and thoughts,
You are to bloom,
Make others feel better and grow in green.
Those curves are made,
By you in ‘U’,
Reach to the pink,
And there they sink.
They make an eye,
I don’t know why,
They seem to be your,
As they glow in shy.
Those pink petals there,
So soft and meek,
They seem to be your hands,
They can be your lips,
So smooth to slip.
The darkness behind,
Shows your mysteries,
I don’t know why,
I get lost in them,
And find there just,
Simple thoughts, clear.
I just want to play,
Colours of life,
Those you have shown,
Just simple thoughts of yours.

सौंदर्य

अदम्य-अद्भुत-सौम्य सौंदर्य
हरित-प्रखर शिशिर-सुमन,
अमोघ-शस्त्र विशाल-शास्त्र
मद-सुरा सब विफल।
उर्वशी-सौंदर्य तुम,
नदी, धरा, सागर, सलिल,
अस्तित्व-उद्भव है सकल।
मन मेरा है विकल।

ज़हर

गरजते-से बादल आज बरस चुके हैं
रंजिशों का गुबार आज बह निकला है|
चुभती-सी सुइयाँ सीने में जो
आज दबा उन्हें मैं सो चुका हूँ|
जिंदगी के मायने सब धुल चुके हैं
जनाज़ा शख्सियत का निकला है|
अश्क़ हैं भारी पलकों में जो
आज दबा उन्हें मैं रो चुका हूँ|
बागीचे के गुल परेशाँ हो चुके हैं
मिलने जो भँवर निकला है|
उम्मीदें जगती है काँटों में जो
आज दबा उन्हें मैं बो चुका हूँ|
अरमान सब ‘ज़हर’ हो चुके हैं
मातम का खजाना निकला है|
सैलाब उठता ज़हन में जो
आज दबा उन्हें मैं खो चुका हूँ|

ख़याल

याद तुम्हें कर रहा था
तुम्हें ही सोच रहा था
कुछ एक पल हुए हैं
तुमसे मिले हुए
पर आज का सारा वक्त
तुमसे मिला हुआ था
ज़हन खाली होता नहीं
तुम्हारे ख़याल भर जाते हैं
वो हँसी तुम्हारी
हर पल मुझे गुदगुदा जाती है
वो महक तुम्हारी हवा में हो जैसे
हर मंजर चमन सा हो जाता है
सुबह की घास में जो ओंस पड़ी थी
तेरे होठों की नमी फीका कर जाती थी
एक इशारा भी मिले जो तेरा
सौ कदम मैं चलता हूँ
रास्ते शर्माते हैं