बूढ़ी राक्षसनी और गरीब बालक

एक गरीब बालक था. उसका नाम बुधिया था. बुधिया के पिताजी बचपन में ही स्वर्गवासी हो गए थे, इसलिए वो अपनी माँ के साथ रहता था. उनका जीवनयापन बहुत मुश्किल से हो रहा था क्यूंकि उनकी कमाई का कोई ठोस जरिया नहीं था. उसकी माँ दूसरों के घर में बर्तन माजा करती थी. पर उसकी माँ बहुत साहसी थी क्योंकि इतनी विपरीत परिस्थिति में भी वो बुधिया को स्कूल भेज रही थीं.     बुधिया के स्कूल में सभी तरह के बच्चे पढ़ते थे. कुछ अमीर थे तो कुछ गरीब. प्रायः सभी दोपहर में होने वाले भोजनावकाश में खाने के लिए कुछ न कुछ लेकर आते थे. बुधिया गरीब होने के कारण कुछ नहीं ला पाता था, पर उसे इस बात से कोई शिकायत नहीं थी, क्योंकि वह घर की परिस्थितियों को अच्छे से समझता था. पर एक दिन उसका बाल मन खुदको नहीं रोक पाया जब उसका एक सहपाठी इडली लेकर आया. उसने घर पहुँच कर माँ से अगले दिन इडली बनाने के लिए कहा. उसकी माँ के पास इडली बनाने के लिए चावल तो थे पर उड़द की दाल नहीं थी.

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